Dr. Kumar Vishwas प्रतिध्वनियाँ ध्वनियों से बोलीं,शांत रहो कोलाहल है…!!

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तम शाश्वत है,रात अमर है,गिरवीं पडे उजाले बोले,
सूरज को युगधर्म सिखाते,अँधियारों के पाले बोले !
चीरहरण पर मौन साधते,प्रखर-मुखों के ताले बोले,
बधिरों के हित रचो युग-ऋचा,वाणी के रखवाले बोले,
कहा समस्या ने निदान से,हल ना होना ही हल है !
प्रतिध्वनियाँ ध्वनियों से बोलीं,शांत रहो कोलाहल है…!!
संविधान से सत्ता बोली,हुकुम-उदूली जारी है ,
कहा न्याय ने निर्दोषों से,सच कहना बीमारी है,
खेतों से पटवारी बोला,श्रम पर स्याही भारी है ,
घुटी चीख़ से पीड़ा बोली,कंठ बहुत आभारी है ,
सर्पर्णियाँ मणियों से बोलीं,बाहर बडा हलाहल है !
प्रतिध्वनियाँ ध्वनियों से बोलीं ,शांत रहो कोलाहल है…!!
खेतों से कॉलोनी बोली,हर कब्जा अनुशासन है ,
पंतजलि से कहा योग ने ,च्यवनप्राश ही आसन है,
विदुर-नीति विदुरों से बोली ,परम सत्य इंद्रासन है ,
मतदाता से कहा भूख ने ,लोकतंत्र ही राशन है ,
संसद की लाचारी बोली ,चुप्पी चीखों का हल है !
प्रतिध्वनियाँ ध्वनियों से बोलीं ,शांत रहो कोलाहल है…!!http://hindi-shayaristatus.in
धर्मराज से तृष्णा बोली ,यक्ष-प्रश्न टाले जाएँ ,
आस्तीन ने किया निवेदन ,कुछ विषधर पाले जाएँ ,
घाट घेरते पंडे बोले ,सागर तक नाले जाएँ ,
एकलव्य से गुरुकुल बोले, कटे अँगूठें ले जाएँ,
प्रश्न वही प्रासंगिक है जो ,हल होकर भी बेहल है !
प्रतिध्वनियाँ ध्वनियों से बोलीं ,शांत रहो कोलाहल है…!!

Dr. Kumar Vishwas प्रतिध्वनियाँ ध्वनियों से बोलीं,शांत रहो कोलाहल है…!!

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