मन तुम्हारा हो गया तो हो गया Presenting Dr Kumar Vishwas in a nostalgic mood

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मन तुम्हारा हो गया तो हो गया

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एक तुम थे जो सदा से अर्चना के गीत थे

एक हम थे जो सदा ही धार के विपरीत थे

ग्राम्य-स्वर कैसे कठिन आलाप नियमित साध पाता



द्वार पर संकल्प के लखकर पराजय कंपकंपाता क्षीण सा स्वर खो गया

तो खो गया मन तुम्हारा हो गया तो हो गया

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लाख नाचे मोर सा मन लाख तन का सीप तरसे

कौन जाने किस घड़ी व्याकुल धरा पर मेघ बरसे

Mann Tumhara | मन तुम्हारा | Dr Kumar Vishwas 2017
Mann Tumhara | मन तुम्हारा | Dr Kumar Vishwas 2017

अनसुने चाहे रहे तन के सजग शहरी बुलावे प्राण में उतरे मगर

जब सृष्टि के आदिम छलावे बीज बदल बो गया तो बो गया

मन तुम्हारा हो गया तो हो गया

मन तुम्हारा हो गया तो हो गया Presenting Dr Kumar Vishwas

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