और कुछ देर यूं ही शोर मचाये रखिये,

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और कुछ देर यूं ही शोर मचाये रखिये,
आस्मां है तो उसे सर पे उठाये रखिये..

उंगलिया गर नही उट्ठें, तो न उट्ठें लेकिन,
कम से कम उस की तरफ आंख उठाये रखिये..

बारिशें आती है तूफान गुजर जाते है,
कोहसारों की तरह पांव जमाये रखिये..

खिड़कियां रात को छोड़ा न करें आप खुलीं,
घर की है बात तो फिर घर में छिपाये रखिये..

अब तो अक्सर नजर आ जाता है दिल आंखों में,
मैं न कहता था कि पानी है दबाये रखिये..

कौन जाने कि वो कब राह इधर भूल पड़े,
अपनी उम्मीद की शमाओ को जलाये रखिये..

कब से दरवाजों की दहलीज तरसती है यारों,
कब तलक गाल को कोहनी पे टिकाये रखिये..

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