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ऐ दिल! मत कर इतनी मोहब्बत तू किसी से,

ऐ दिल! मत कर इतनी मोहब्बत तू किसी से,
इश्क़ में मिला दर्द तू सह नहीं पायेगा,

टूट कर बिखर जायेगा एक दिन अपनों के हाथों,
किसने तोड़ा ये भी किसी से कह नहीं पायेगा।

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ऐ दिल! मत कर इतनी मोहब्बत तू किसी से,

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तेरी किताब के हर्फ़े, समझ नहीं आते, Hindi Shayari

तेरी किताब के हर्फ़े, समझ नहीं आते*,
ऐ ज़िन्दगी तेरे फ़लसफ़े, समझ नहीं आते,

कितने पन्नें हैं, किसको संभाल कर रखूँ,
और कौन से फाड़ दूँ सफ़हे ,समझ नहीं आते,

चौंकाया है ज़िन्दगी, यूँ हर मोड़ पर तुमने,
बाक़ी कितने हैं शगूफे, समझ नहीं आते,.

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दर्द कागज़ पर, मेरा बिकता रहा,Hindi Kavita

दर्द कागज़ पर,
मेरा बिकता रहा,

मैं बैचैन था,
रातभर लिखता रहा..

छू रहे थे सब,
बुलंदियाँ आसमान की,

मैं सितारों के बीच,
चाँद की तरह छिपता रहा..

अकड होती तो,
कब का टूट गया होता,

मैं था नाज़ुक डाली,
जो सबके आगे झुकता रहा..

बदले यहाँ लोगों ने,
रंग अपने-अपने ढंग से,

रंग मेरा भी निखरा पर,
मैं मेहँदी की तरह पीसता रहा..

जिनको जल्दी थी,
वो बढ़ चले मंज़िल की ओर,

मैं समन्दर से राज,
गहराई से सीखता रहा..!!

“ज़िन्दगी कभी भी ले सकती है करवट…
तू गुमान न कर…

बुलंदियाँ छू हज़ार, मगर…
उसके लिए कोई ‘गुनाह’ न कर.

कुछ बेतुके झगड़े,
कुछ इस तरह खत्म कर दिए मैंने

जहाँ गलती नही भी थी मेरी,
फिर भी हाथ जोड़ दिए मैंने

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बिकता है गम हँसी के बाज़ार मैं,

बिकता है गम हँसी के बाज़ार मैं,

लाखो दर्द छिपे होते है एक छोटे से इनकार मैं,

वो क्या समझ पाएंगे प्यार की कशिश,

जिन्होंने फर्क ही नहीं समझा पसंद और प्यार मैं…!!!